डिजिटल डोनेशन रसीद सिस्टम

मदारिस, मसाजिद और समाजी इदारों में चन्दा इंतज़ाम का एक जदीद क़दम

मदारिस, मसाजिद और समाजी इदारे बरसों से तालीम, फलाही कामों और अवामी खिदमत के लिए चन्दा जमा करते आ रहे हैं। आम तौर पर यह निज़ाम कागज़ी रसीद बुक और मुख्तलिफ इलाकों में काम करने वाले एजेंटों के जरिए चलता रहा है।

आज स्मार्टफोन और डिजिटल इत्तिसाल के बढ़ते इस्तेमाल के साथ यही निज़ाम अब ज्यादा आसान, शफ्फाफ और महफूज़ तरीके से डिजिटल डोनेशन रसीद सिस्टम के जरिए चलाया जा सकता है।

यह सिस्टम मदारिस और समाजी इदारों के मौजूदा ढांचे को बरकरार रखते हुए डिजिटल रिकॉर्ड रखने की सहूलियत भी देता है।

सिस्टम कैसे काम करता है

हर मदरसा या इदारे का एक एडमिन होता है जो सिस्टम को मैनेज करता है।
एडमिन की तरफ से एजेंट मुक़र्रर किए जाते हैं और उन्हें अपना लॉगिन दिया जाता है।
एजेंट हिन्दुस्तान के मुख्तलिफ शहरों और इलाकों से चन्दा जमा करते हैं।
हर डोनेशन पर फौरन डिजिटल रसीद तैयार हो जाती है
यह रसीद व्हाट्सएप के जरिए डोनर को तुरंत भेजी जा सकती है
एजेंट वक्त-ब-वक्त जमा की गई रकम एडमिन को सुपुर्द करते हैं
एडमिन जरूरत के मुताबिक एजेंट के खर्च के लिए एक मुक़र्रर फीसद तय कर सकता है।

सिस्टम की खास खूबियाँ

✔ डोनर को फौरन डिजिटल रसीद मिल जाती है
✔ चन्दा रिकॉर्ड पूरी तरह शफ्फाफ और मुनज़्ज़म रहता है
✔ एजेंट-वाइज़ कलेक्शन आसानी से देखा जा सकता है
✔ डिजिटल रिकॉर्ड महफूज़ और हमेशा दस्तयाब रहता है
✔ रोज़ाना, हफ्तावार या माहाना रिपोर्ट फौरन हासिल की जा सकती है
✔ कागज़ी रसीद बुक पर इनहिसार कम हो जाता है

रोज़मर्रा कलेक्शन में इस्तेमाल

शुरुआत में मदारिस और इदारे इस सिस्टम को मौजूदा कागज़ी रसीदों के साथ भी इस्तेमाल कर सकते हैं ताकि एडमिन और एजेंट इस निज़ाम से अच्छी तरह वाकिफ हो जाएँ।

कुछ अरसे के बाद इदारे चाहें तो मुकम्मल डिजिटल और पेपरलेस रसीद सिस्टम भी अपना सकते हैं।

डिजिटल दौर की तरफ एक कदम

आज दुनिया भर में डिजिटल सिस्टम रोज़मर्रा इंतजामी कामों का हिस्सा बनते जा रहे हैं। चन्दा कलेक्शन में डिजिटल रसीद सिस्टम शामिल करना भी इसी सिलसिले का एक जदीद और मुनासिब कदम है।

इससे इदारों को बेहतर शफ्फाफियत, भरोसेमंद रिकॉर्ड और डोनर से बेहतर इत्तिसाल हासिल होता है।

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