मदारिस, मसाजिद और समाजी इदारे बरसों से तालीम, फलाही कामों और अवामी खिदमत के लिए चन्दा जमा करते आ रहे हैं। आम तौर पर यह निज़ाम कागज़ी रसीद बुक और मुख्तलिफ इलाकों में काम करने वाले एजेंटों के जरिए चलता रहा है।
आज स्मार्टफोन और डिजिटल इत्तिसाल के बढ़ते इस्तेमाल के साथ यही निज़ाम अब ज्यादा आसान, शफ्फाफ और महफूज़ तरीके से डिजिटल डोनेशन रसीद सिस्टम के जरिए चलाया जा सकता है।
यह सिस्टम मदारिस और समाजी इदारों के मौजूदा ढांचे को बरकरार रखते हुए डिजिटल रिकॉर्ड रखने की सहूलियत भी देता है।
शुरुआत में मदारिस और इदारे इस सिस्टम को मौजूदा कागज़ी रसीदों के साथ भी इस्तेमाल कर सकते हैं ताकि एडमिन और एजेंट इस निज़ाम से अच्छी तरह वाकिफ हो जाएँ।
कुछ अरसे के बाद इदारे चाहें तो मुकम्मल डिजिटल और पेपरलेस रसीद सिस्टम भी अपना सकते हैं।
आज दुनिया भर में डिजिटल सिस्टम रोज़मर्रा इंतजामी कामों का हिस्सा बनते जा रहे हैं। चन्दा कलेक्शन में डिजिटल रसीद सिस्टम शामिल करना भी इसी सिलसिले का एक जदीद और मुनासिब कदम है।
इससे इदारों को बेहतर शफ्फाफियत, भरोसेमंद रिकॉर्ड और डोनर से बेहतर इत्तिसाल हासिल होता है।